यूपी: रीडिंग का खेल, हेराफेरी में लगा 1.11 करोड़ का चूना, उड़े अधिकारियों के होश


  


फर्रुखाबाद मे विद्युत वितरण निगम के शहर व कायमगंज टाउन डिवीजन में मीटर बदलने के बजाय कंप्यूटर फीडिंग में हेराफेरी कर रीडिंग का खेल किया गया है। इसमें विभाग के ही जिम्मेदारों की कंप्यूटर आईडी का इस्तेमाल हुआ।


लखनऊ मुख्यालय में कायमगंज का 96.73 तो शहर में 14.45 लाख रुपये राजस्व क्षति का मामला पकड़ा गया। वाणिज्य निदेशक ने इस संबंध में जवाब मांगा है। जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर स्थित विद्युत वितरण निगम के कायमगंज डिवीजन में जिम्मेदारों का खेल जगजाहिर है।


यहां फर्जी लाइन बननी हो या लाइन शिफ्टिंग, यह तो उनके बाएं हाथ का खेल है। अब तो बड़े भार के कनेक्शनों में बिना मीटर बदले ही कंप्यूटर फीडिंग में हेराफेरी कर नया मीटर नंबर इजाद कर लाखों यूनिट रीडिंग का खेल कर दिया गया।
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इसकी रिपोर्ट यूपीपीसीएल के लखनऊ स्थित मुख्यालय में चेक की गई तो अधिकारी भी चौंक गए। कायमगंज टाउन के बड़े भार वाले 86 कनेक्शनों में 14 लाख 72 हजार 366 यूनिट रीडिंग कम दिखाकर विभाग को 96 लाख 73 हजार 298 रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। और तो और इस खेल में जिम्मेदारों की ही कंप्यूटर आईडी का इस्तेमाल किया गया है।


फर्रुखाबाद नगरीय खंड में भी बड़े भार वाले पांच कनेक्शनों पर एक लाख 98 हजार 154 यूनिट रीडिंग कम कर विभाग को 14 लाख 45 हजार 470 रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाई गई। दोनों नगरीय डिवीजन में कुल 91 कनेक्शनों की 16 लाख 70 हजार 520 यूनिट हजम कर 1 करोड़ 11 लाख 18 हजार 768 रुपये का नुकसान किया गया है। इस मामले में वाणिज्य निदेशक डीके सिंह ने जवाब मांगा था। 


कुल 31 डिवीजन में हुआ 12.71 करोड़ का खेल 
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के कुल 31 डिवीजन में 680 कनेक्शनों पर 1 करोड़ 90 लाख 75 हजार 723 यूनिट कम दिखाकर 12 करोड़ 71 लाख 61 हजार 730 रुपये की विद्युत निगम को राजस्व की क्षति पहुंचाई गई।
 
जनपद अलीगढ़ के पांच डिवीजन, एटा, कन्नौज, छिबरामऊ, इटावा के दो, औरैया, उरई के दो, झांसी, ललितपुर, मऊरानीपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा के दो, करबी चित्रकूट, मथुरा के तीन, कोसी कला, फिरोजाबाद के तीन डिवीजन व शिकोहाबाद डिवीजन में रीडिंग में खेल कर राजस्व को नुकसान पहुंचा गया है।  


*बिल संशोधन में दूसरे की आईडी पर होता खेल*
कायमगंज डिवीजन में विभागीय अधिकारियों से लेकर संविदा कर्मियों तक ही कंप्यूटर आईडी जनरेट कराई गई। जिसका मौका लगता दूसरे की आईडी से खेल कर रहा है। साहब के करीबी होने से संविदा कर्मी बिल संशोधन के खेल में माहिर हो चुके हैं। हालांकि आरएपीडीआरपी डिवीजन में बिल संशोधन का अधिकार एसडीओ व अधिशासी अभियंता को ही होता है।


विभागीय सूत्रों की मानें तो स्थानांतरित हुए एक लिपिक की आईडी से साहब के एप्रूवल के बाद बिल संशोधन अभी भी किया जा रहा है। बिचौलिए व परिचितों के जरिए पहुंचने वाले उपभोक्ता तय रकम देकर आधी-आधी रकम पर बिल का निपटारा कर रहे हैं। विभागीय कुछ जानकारों ने जब स्थानांतरित लिपिक की आईडी बंद कराने की बात कही तो जिम्मेदारों ने ही यह कहते हुए मना कर दिया कि बिल संशोधन में इस आईडी का लाभ लिया जा सकता है। कोई गलती होने पर संबंधित कर्मचारी फंसेगा। 


 
*जेई ने दी तहरीर, उसमें भी हो गया खेल*
अवर अभियंता नितिल उपाध्याय की कंप्यूटर आईडी से कुछ कनेक्शनों की रीडिंग में हेराफेरी की गई। जेई ने विरोध जताया तो साहब के करीबी संविदा कर्मी उनसे भिड़ गए। मारपीट की नौबत आ गई। इस पर अवर अभियंता ने दो संविदा कंप्यूटर आपरेटरों के खिलाफ गलत तरीके से आईडी का इस्तेमाल व विवाद करने की तहरीर दी। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें कोतवाली से छुड़वा लिया गया। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने अपना फायदा देखते हुए मामला रफा-दफा कर दिया। डिवीजन में उन्हीं कंप्यूटर आपरेटरों से फिर काम लेना शुरू कर दिया गया। 


*क्या कहते हैं जिम्मेदार* 
अधिशासी अभियंता कायमगंज जीएस कशेरवाल ने बताया कि जेई की कंप्यूटर आईडी गलत तरीके से इस्तेमाल करने वाले संविदा आपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उपभोक्ताओं से रिकवरी की जा रही है। यदि आरोपी संविदा आपरेटर काम करते पाए गए तो फिर कार्रवाई की जाएगी। लिपिक की आईडी इस्तेमाल किए जाने के संबंध में उन्होंने बताया कि आईडी पासवर्ड लिपिक के पास होता है, इससे वह स्वयं जिम्मेदार है। पूरे मामले की जांच एसडीओ दिलीप गंगवार कर रहे हैं