छापा मारकर लीपापोती करते है औषधि निरीक्षक ,खाद्य एवं औषधि प्रशासन  कार्यालय नहीं आते

 


जौनपुर। औषधि निरीक्षक द्वारा विगत दो माह से जनपद का कार्यभाल संभाला गया है। लेकिन इस अवधि में वे आज तक कलेक्ट्रेट स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कार्यालय में कदम तक नहीं रखा। इस बात की पुष्टि विभाग के मुखिया और जिला अभिहित अधिकारी वेद प्रकाश मिश्रा तथा अन्य कर्मचारियों ने की है। कर्मचारियों का यह तक कहना है कि वे औषधि निरीक्षक को पहचानते ही नहीं। औषधि निरीक्षक विगत सोमवार को जनपद में आये थे लेकिन कार्यालय न आकर वे सीधे धन उगाही वाले स्थान पर छापामारी करने निकल लीये।
जिला अस्पताल के आस पास की आधा दर्जन से अधिक दुकानों पर छापा मारा जहां प्रतिबन्धित दवाओं की बड़ी मात्रा पायी गयी और सभी से मोटी रकम लेकर मामले में लीपापोती का खेल कर दिया गया। उन्होने 16 नवम्बर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि उन्होने कुल 25 से अधिक नमूने लिये गये जिसमें 15 नमूने नकली रहे।


   कार्यवाही की बात की जाय तो सहारा हास्पिटल पर छापेमारी की गयी थी तो मेडिकल स्टोर का लाइसेन्स नहीं था और नकली दवायें बरामद की गयी थी लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया और खेल कर दिया गया। अब उक्त हास्पिटल के मेडिकल स्टोर का लाइसेन्स बनाया जा रहा है।


    सूत्रों का दावा है कि औषधि निरीक्षक ने अब तक चार दर्जन से अधिक दुकानों की छापामारी किया है कार्यवाही न करने के नाम पर 50 लाख रूपये सम्बन्धित लोगों से वसूला है। उनका कहना है कि कुछ लोग उनके छापेमारी को रोकने का प्रयास कर रहे है लेकिन वे प्रत्येक छापेमारी की जानकारी मीडिया को न देकर फील गुड करने में मशगूल है।


   औषधि निरीक्षक ने यह भी यह भी दावा किया कि अगर किसी को कोई समस्या है तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में उनसे संपर्क कर सकते हैं तो उनका दावा झूठा है वे उक्त कार्यालय में कभी आये ही नहीं और मनमानी कार्यो से धनवसूली कर रहे है।


   एक उच्च पदाधिकारी ने बताया कि औषधि निरीक्षक के पूरे प्रकरण की आडियो और वीडीओ युक्त प्रमाण सहित शासन और प्रशासन को जल्द ही उपलब्ध करा दी जायेगी।