मोदी कैबिनेट 2.0:जानें, भारत सरकार के फैसलों में CCS की क्या होती है भूमिका

नई दिल्ली: गंभीर मंथन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल की तस्वीर अब सामने है। सरकार की नीतियों को दिशा और दशा देने वाले चेहरों के विभागों का ऐलान हो चुका है। सभी कयासों पर विराम लग चुका है। अमित शाह अब इस देश के गृहमंत्री है, राजनाथ सिंह को रक्षा, एस जयशंकर को विदेश और निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। ये चारों चेहरे पीएम मोदी की अगुवाई में नीति और रीति को अंतिम रूप देंगे। पीएम की अगुवाई में गृहमंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को सीसीएस के नाम से जानते हैं। जब कभी भी घरेलू और बाह्य परेशानियां आती हैं तो सीसीएस की अहम बैठक बुलाई जाती है।

    सुरक्षा स्थिति पर विचार विमर्श और दुश्मनों के खिलाफ रणनिति बनाने के लिए सीसीएस की बैठक आयोजित  की जाती है। इस मीटिंग में खासतौर पर दुश्मनों को किस तरह जवाब दिया उसके बारे में रणनीति बनाई जाती है। भारत सरकार की केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सेक्युरिटी देश की सुरक्षा को लेकर चर्चा, बहस करती है। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा उपकरण, रक्षा नीति और सुरक्षा में खर्च को लेकर आखिरी फैसले लिए जाते हैं।

सवाल ये है कि अमित शाह को गृहमंत्रालय का कमान देने के पीछे मकसद क्या है। जानकारों की इस मुद्दे पर अलग अलग राय है। लेकिन उससे पहले गुजरात से दलित नेता जिग्नेश मेवानी क्या कहते हैं ये जानना जरूरी है। वो कहते हैं अब देश के गृहमंत्री अमित शाह और आप समझ सकते हैं वूमन प्राइवेसी पर क्या होने वाला है। लेकिन इस मुद्दे पर जानकार कहते हैं कि कुछ लोग पूर्वाग्रह की वजह से इस तरह की बाते करते हैं। लेकिन अगर आप गुजरात पर नजर डालें तो जिस तरह से आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की गई उससे साफ है कि अमित शाह के तेवर ढीले नहीं होंगे। 


इसके साथ ही अगर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बात करें तो गृहमंत्री रहते हुए उनका कार्यकाल अच्छा रहा। उनके जमाने में नक्सलवाद का दायरा 126 जिलों से सिमट कर 25 से कम जिलों में रह गया है। इसके अलावा उन्होंने एनआरसी के संबंध में किसी विरोध की परवाह नहीं की।


इसके अलावा अगर आप  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बात करें तो पिछली सरकार में रक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने जिस तरह से राफेल के मुद्दे पर सरकार के पक्ष को रखा उससे विपक्ष को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके अलावा रक्षा तैयारियों के संबंध में वो कई कदम आगे बढ़ीं। 


यही नहीं अगर विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात करें तो वो किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं। लेकिन पिछली सरकार में विदेश सचिव रहते हुए भारत के लिए वो कूटनीतिक जमीन तैयार की जिसका असर डोकलाम, भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन वर्थमान की रिहाई और जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने में दिखाई दिया। जानकार कहते हैं कि साहसी फैसले के लिए मजबूत इरादों वाली सरकार के साथ साथ मजबूत शख्सियतों की जरूरत होती है। अगर मौजूदा सरकार के सीसीएस को देखें तो एक बात साफ है कि आने वाले समय में हम सब कुछ बडे फैसलों के साक्षी बनेंगे।