जन्मदिवस विशेष:भये प्रगट कृपाला दीन दयाला...


*जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।*
*चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥190॥*


भावार्थ:-योग, लग्न, ग्रह, वार और तिथि सभी अनुकूल हो गए। जड़ और चेतन सब हर्ष से भर गए। (क्योंकि) श्री राम का जन्म सुख का मूल है॥190॥


*नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥*
*मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥1॥*


भावार्थ:-पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित्‌ मुहूर्त था। दोपहर का समय था। न बहुत सर्दी थी, न धूप (गरमी) थी। वह पवित्र समय सब लोकों को शांति देने वाला था॥1॥


*सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ॥*
*बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा॥2॥*


भावार्थ:-शीतल, मंद और सुगंधित पवन बह रहा था। देवता हर्षित थे और संतों के मन में (बड़ा) चाव था। वन फूले हुए थे, पर्वतों के समूह मणियों से जगमगा रहे थे और सारी नदियाँ अमृत की धारा बहा रही थीं॥2॥


*सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना॥*
*गगन बिमल संकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा॥3॥*


भावार्थ:-जब ब्रह्माजी ने वह (भगवान के प्रकट होने का) अवसर जाना तब (उनके समेत) सारे देवता विमान सजा-सजाकर चले। निर्मल आकाश देवताओं के समूहों से भर गया। गंधर्वों के दल गुणों का गान करने लगे॥3॥


*बरषहिं सुमन सुअंजुलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी॥*
*अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा॥4॥*


भावार्थ:-और सुंदर अंजलियों में सजा-सजाकर पुष्प बरसाने लगे। आकाश में घमाघम नगाड़े बजने लगे। नाग, मुनि और देवता स्तुति करने लगे और बहुत प्रकार से अपनी-अपनी सेवा (उपहार) भेंट करने लगे॥4॥


*इस रामनवमी के पावन अवसर पर आप सभी हार्दिक बधाई💐💐💐🕉🕉🕉*