आश्रमों और हॉस्टलों के हजार से ज्यादा छात्र नक्सलियों की सप्लाई चेन का हिस्सा, पहुंचाते हैं सामान, परिजन भी शामिल

  • नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा के गांवों में हर आश्रम के तीन से चार बच्चों को जोड़ने की रिपोर्ट...

  • खुफिया विभाग को मिला पुख्ता इनपुट, हाल में सामने आ चुके हैं छह से अधिक मामले

  • कई जगह बड़े नक्सली नेताओं का आना-जाना भी, बैठक में करते हैं बच्चों का ब्रेनवॉश

  • हथियारों की सप्लाई में इनका इस्तेमाल नहीं, संभव है कि सूचना तंत्र में भी करें उपयोग  


राज्य ब्यूरो  | जगदलपुर . अब तक बंदूक के बल पर आम आदिवासियों काे अपने संगठन से जोड़ने वाले नक्सली अपना दायरा बढ़ाने में जुट गए हैं। हाल में आश्रम और छात्रावासों में छह से अधिक ऐसे खुलासे हुए हैं, जिनमें छात्रों का नक्सली कनेक्शन सामने आया है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गंभीर और चिंताजनक है। बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों के आश्रम व छात्रावासों के एक हजार से ज्यादा छात्र नक्सलियों से जुड़े हुए हैं। ये सप्लाई चेन के तौर पर नक्सलियों तक चाहे-अनचाहे सामान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई दिन के इनपुट के बाद तैयार खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक कई जगह बच्चों के रिश्तेदार भी इस काम में शामिल हैं। नक्सलियों को इनके जरिये दवाएं और रोजमर्रा की जरूरत के सामान आसानी से पहुंच रहा है। ये चेन तैयार होने के बाद नक्सलियों के शहरी नेटवर्क पर अब सिर्फ हथियारों की सप्लाई का जिम्मा है। पुलिस की चौकसी बढ़ने के बाद नक्सलियों ने समानांतर व्यवस्था तैयार की है। 


अंदरूनी इलाके टारगेट 



  • छात्रों से फिलहाल रसद की सप्लाई करवाई जा रही है। जरूरत होने पर चुनिंदा छात्रों को नक्सली अपने साथ अपनी मिलिट्री कंपनी में भी जोड़ने की तैयारी में हैं। 

  • नक्सलियों ने  इस काम के लिए अंदरूनी इलाकों के गांवों को चुना है। क्योंकि यहां लोगों की नजर कम पड़ती है। शहर से दूर होने के कारण दहशत भी ज्यादा है।


शहरी नेटवर्क पर नजर तेज इसलिए तैयार की समानांतर व्यवस्था


हम इनपुट पर काम कर रहे हैं: बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि नक्सली अपने साथ छात्रों को जोड़ रहे हैं, ऐसी खबरें पुलिस के पास भी हैं। जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया था कि वे स्कूल, आश्रम और छात्रावासों के शिक्षकों को सजग करें कि वे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। हम देखेंगे कि इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए क्या कर सकते हैं।​


उइके जैसे नेता भी मिलने पहुंचते हैं  : नक्सली संगठन में बच्चों का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि बच्चों से सीधे नक्सलियों के बड़े नेता मिल रहे हैं। कुछ समय पहले जारी हुई खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजापुर जिले के गंगालूर आश्रम में अक्सर रात में नक्सली लीडर गणेश उइके आया करता था। वह बच्चों से लेनिन और माओ के किस्से बताने के साथ सीधे संवाद करता है।


बीजापुर और दंतेवाड़ा के सबसे ज्यादा केस  : पिछले चार सालों में बच्चों के नक्सलियों से जुड़ने के सबसे ज्यादा इनपुट बीजापुर जिले से मिले हैं। यहां गौरनाथ, गंगालूर, मनकेली, पेद्दाकुड़मा जैसे इलाकों के बच्चे नक्सलियों के नेटवर्क में शामिल हैं। इसके बाद दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण, कुआकोंडा और नारायणपुर के माड़ वाले इलाके में नक्सलियों के साथ जुड़े हैं। 


सरकार नहीं बना पाई प्रभावी कार्ययोजना : नक्सलियों से आश्रम व छात्रावासों के छात्र-छात्राओं के जुड़ने की सूचना स्थानीय अफसरों के साथ राज्य व केंद्र सरकार के पास भी है। बच्चे पकड़े भी गए हैं, लेकिन अब तक इसे रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना नहीं बनाई गई है। बच्चों का दुरुपयोग बदस्तूर जारी है, लेकिन ये दूर कैसे किया जाए, इस बारे में नहीं सोचा जा रहा है।


ब्रेनवॉश किया... और बच्चों के मन में बात बैठाई कि वे बुराई से लड़ने वाले लोग हैं : इनपुट के मुताबिक बच्चों को अपने साथ जोड़ने के लिए नक्सलियों ने जोर-जबरदस्ती नहीं की, लालच भी नहीं दिया है। बच्चों के सामने नक्सलियों को हीरो की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। ब्रेनवॉश करने के लिए गांव के उन युवक-युवतियों की कहानियां सुनाई जा रही जो मुठभेड़ में मारे गए या बड़े हमलों में शामिल रहे हों। ये कहानियां बिल्कुल वैसी ही हैं जैसे शहरों के बच्चे टीवी, सीरियलों और फिल्मों में विभिन्न किरदारों के तौर पर देखते रहे हैं। उनके मन में ये बात बैठाई गई कि ये बुराई के खिलाफ लड़ने वाले लोग हैं। हमें भी ऐसा बनना है। इसके अलावा खास बात यह है कि नक्सलियों ने बाल संघम दल को इससे दूर रखा है। बाल संघम के जिम्मे अब भी पुरानी जिम्मेदारियां हैं। जिसमें वे पुलिस की मूवमेंट की सूचना देना, गांव की गतिविधियों पर नजर रखना, चेतना नाट्य मंडली में नाचने-गाने जैसे काम कर रहे हैं। संभव है कि आगे इनका उपयोग सूचना तंत्र के तौर पर भी किया जाए।


नक्सलियों से सूची लेकर आश्रम में छोड़ते हैं रिश्तेदार, हफ्तेभर बाद सामान ले जाते हैं : नक्सलियों ने बच्चों और उनके रिश्तेदारों काे जोड़कर जो सप्लाई चेन तैयार की है, उसका प्रबंधन बेहद चालाकी से तैयार किया गया है। पहले आश्रमों और छात्रावासों में छात्रों से मिलने उनके रिश्तेदारों के साथ नक्सलियों का एक आदमी आता है। छात्रों को जरूरत के सामान की लिस्ट के साथ पैसे दिए जाते हैं। इस लिस्ट से कौन कितना सामान लाएगा, ये आपस में छात्र तय करते हैं। अलग-अलग दिन सामान की खरीदी होती है। जैसे - 12 साबुन की जरूरत है तो एक सप्ताह तक चार-चार छात्र हर दिन एक-दो साबुन खरीदते हैं। इन पर किसी को शक भी नहीं होता। सप्ताहभर सामान खरीदने के बाद ये इसे गांव तक पहुंचाने जाते हैं या फिर दोबारा इनसे मिलने पहुंचने वाले परिवार के सदस्यों को दे देते हैं।