सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही ,महिलाओं के सम्मान में जिला कलेक्टर ने किया यह अनोखा कार्य

महिलाओं के सम्मान में जिला कलेक्टर ने किया यह अनोखा कार्य








बैतूल /जिले में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान में सभी अधिकारियों ने 8 मार्च को पिंक ड्रेस (पिंक शर्ट) पहनने का निर्णय लिया गया है .कलेक्टर श्री तरूण कुमार पिथोड़े के पहल पर आज सभी अधिकारी म हिलाओं के सम्मान स्वरूप पिंक शर्ट पहनेंगे . पिंक शर्ट पहन कर पुरुष आज सारे दिन सरकारी दफ्तरों में अपना काम करेंगे।


कलेक्टर श्री तरूण पिथोड़े ने हमें जानकारी देते हुए बताया, की महिलाओं के सम्मान की आज समाज को आवश्यकता है ।प्राचीन समाज से आज तक हम विश्लेषण करें ,तो स्त्री और पुरुष के बीच समानता का भाव लिए हुए जो भी समाज अपनी विचारधारा को प्रस्तुत करता है वह सामाजिक रूप से आर्थिक और सामाजिक परिवेश में सर्वोच्च सत्ता के शिखर को प्राप्त करता है। ऐसी स्थिति में पुरुष जब पिंक शर्ट पहन कर अपने कार्य का दिन भर निष्पादन करेंगे ,तो उनके मन में यह विचार उत्पन्न होगा ,कि हम आज महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के लिए इन परिवेश को धारण करके रखे हुए हैं ।


   जिससे निश्चित ही एक सजगता, सम्मान और संवेदनशीलता का भाव पुरुषों के मन में महिलाओं के प्रति उत्पन्न होगा ।आज महिला दिवस है, महिलाओं को हमें इसलिए उन्नत नहीं करना है क्योंकि उन्नति उनकी मांग है, बल्कि महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और प्रगति के पथ पर उन्हें अग्रेषित करने का भाव हमारे देश और उससे भी ऊपर समूचे विश्व के विकास का एक ऐसा मार्ग प्रशस्त करेगा, जिसमें असमानता, असंतोष, आर्थिक विसंगतियां जैसे बिंदु कभी भी सम्मिलित नहीं होंगे। वास्तव में जेंडर कोआर्डिनेशन एक ऐसी अवधारणा है, जिसे यदि समाज समझे तो बहुत से अपराधों को भी विराम लग जाएगा। हमें बहुत दुख होता है ,जब सभ्य समाज महिलाओं की अस्मिता पर कुठाराघात करता है।


    ऐसी स्थिति में महिला और पुरुष में समानता रूपी प्रगति के मूलभूत सिद्धांतों को धक्का लगता ही है, साथ ही साथ समूचा समाज पतन की ओर उन्मुख हो जाता है। ऐसी स्थिति में जेंडर कोआर्डिनेशन और इक्वल जेंडर स्टेटस जैसे शब्द बेईमानी प्रतीत होते हैं।


    संक्षेप में ,यदि हम स्वीकार करें तो यह एक निर्णायक पहल है ,जोकि सभी समाज के पुरुष प्रधानता के गुणों पर इस रूप में चार चांद लगा देगी कि महिलाओं के महत्व को राष्ट्रीय हित में स्वीकार कर लिया गया है। मुझे चिंता नहीं है कि मैं या समाज की किसी भी महिला का इस बदलते परिवेश में समाज में कौन सा स्थान है? और वह पुरुषों से कितने आगे या पीछे हैं। मुझे तो चिंता है ,कि राष्ट्र विकास के पथ पर मैं और तमाम महिलाएं लगातार आगे बढ़े और राष्ट्रहित के लक्ष्य को साधें।