सरकार ने पकड़ी दवा में बड़ी धांधली! ऐसे हो रही थी मिलावट

केंद्र सरकार ने दवाओं के लिए आयात हो रहे कच्चे माल यानी API में बड़ी धांधली पकड़ी है.


केंद्र सरकार ने दवाओं के लिए आयात हो रहे कच्चे माल यानी API में बड़ी धांधली पकड़ी है. खासकर चीन से बिना रोकटोक घटिया गुणवत्ता, प्रतिबंधित और मिलावटी श्रेणी के API आयात हो रहे हैं. इंपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठा कर न सिर्फ बगैर मंजूरी नई दवाइयां लॉन्च कर दी जा रही हैं बल्कि घटिया कच्चे माल की वजह से कई दवाओं का मरीजों पर सही प्रभाव भी नहीं पड़ रहा है. 

केंद्र सरकार ने एपीआई में बड़ी धांधली पकड़ी है. चीन से भारत 72 फीसदी एपीआई इम्पोर्ट करता है. प्रतिबंधित एपीआई भी भारत में पहुंच रहा है. एपीआई बिना लाइसेंस इंपोर्ट हो रहे हैं.

रोकथाम के लिए सरकार उठाएगी ये कदम- सरकार को 6 से 8 फीसदी एपीआई में मिलावट का अनुमान है. इस पर रोकथाम के लिए सरकार ने इंपोर्ट मॉनिटरिंग के लिए ट्रेस एंड ट्रैक मैक्निजम का प्रस्ताव दिया है. इम्पोर्ट हो रहे हर एपीआई पर क्यूआर (QR) कोड होगी. क्यूआर कोडिंग का डेटा बेस कस्टम्स पर तैयार होगा. दवाओं पर फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था डीटैब 2 अप्रैल की बैठक में फैसला लेगी.


क्या होता है एपीआई
एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स. ये इंटरमीडिएट्स, टेबलेट्स, कैप्सूल्स और सिरप बनाने के मुख्य रॉ मैटेरियल्स होते हैं. किसी भी दवाई के बनने में एपीआई की मुख्य भूमिका होती है और इसी एपीआई के लिए अब भारतीय कंपनियां बहुत हद तक चीन पर निर्भर हैं.