अंतत:हम बेटों की मौत का बदला लेना सीख ही गए

    भारत को ढुलमुल लोकतंत्र मानने वालों को अब हम यह कह सकते हैं कि कृपया अपना प्रलाप बंद करें। हमने वह आवरण उतार फेंका है, जो छद्म सहनशीलता के नाम पर हमें अपने ही बेटों की मौत का बदला चुकाने से रोकता था।आज आह्लाद और गौरव के इस पुलक भरे लम्हे में जब समूचा देश खुद को विजेता महसूस कर रहा है, तब मैं अत्यंत विनम्रतापूर्वक सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि हम हिन्दुस्तानियों के दिल में बहुत गहरे तक धंसी एक नुकीली फांस निकल गई है।


   


 अरुण कुमार सिंह (संपादक )उत्तर प्रदेश जागरण .कॉम 


  पुलवामा के बाद नई दिल्ली ने जो कड़ा रुख अपनाया, उससे तय था कि कुछ होगा और जो होगा, वह इतना बड़ा होगा कि दुनिया उस पर ध्यान देने के लिए मजबूर हो जाएगी।


   उरी के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तान के सत्ता सदन को संदेश दिया था कि अब भारत चुप नहीं बैठने वाला, पर रावलपिंडी के सेनानायकों की चमड़ी बहुत मोटी है। उन्हें लगा कि सीधे न सही, पर अपने प्यादे मसूद अजहर के जरिए भारतीय राष्ट्र-राज्य के दिल में बार-बार सुराख किया जा सकता है।    


   बीस साल पहले जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को एअर इंडिया के विमान आईसी-814 के अपहरण के बाद अकुलाई और हकबकाई भारत सरकार ने रिहा कर कंधार भेज दिया था। तब से अब तक धर्म के नाम पर अधर्म की खेती करने वाला यह शख्स हिन्दुस्तान को लहूलुहान करने का कोई मौका नहीं चूकता। एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय में ‘ब्लैक मेल' हुई सरकार का उनके उत्तराधिकारी नरेंद्र मोदी ने प्रतिकार कर दिया है।


    


जानने वाले जानते थे कि नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं में ‘मोदी है, तो मुमकिन है' अथवा ‘एक-एक का बदला चुकाएंगे' जैसे जुमले यूं ही नहीं उछल रहे। इधर के सालों में यह पहला मौका है, जब भारत ने ताल ठोंककर प्रतिशोध लिया है। अब तक इस रीति-नीति पर वाशिंगटन, बीजिंग अथवा तेल अवीव का ही हक हुआ करता था। संविधान की प्रस्तावना की तर्ज पर कहें, तो कह सकते हैं कि हम भारतीय गणराज्य के लोग अब न भूलेंगे, न माफ करेंगे।


हम जैसे खबरनवीसों की नींद ही आज सुबह पाकिस्तान सेना के ‘ट्वीट' से टूटी, जिसमें उसने ‘अपने शब्दों में' भारतीय वायु सेना के हमले को स्वीकारा था। शायद यह पहला मौका है, जब वायु सेना ने युद्धकाल के सिवाय इतने कारगर और विशाल हमले को अंजाम दिया है। अमेरिकी एफ-16 विमानों से लैस पाक वायु सेना इस सटीक रणनीति के आगे फिर बौनी साबित हुई। हमारे मिराज-2000 विमान 21 मिनट तक उसकी सरजमीं पर आग बरसाते रहे और वे कुछ न कर सके। यह सर्जिकल स्ट्राइक इस्लामाबाद या रावलपिंडी के अहंकारी अधिकार संपन्न लोगों पर भी हुई है।


अब दहशतगर्दों को समझ में आएगा कि वे जिनकी गोद में खुद को महफूज महसूस करते थे, वे सरपरस्त खुद कितने असुरक्षित हैं? यहां हमें भूलना नहीं चाहिए कि अभी हमने जैश के कुछ ठिकाने ध्वस्त किए हैं, आतंकवाद से लड़ाई अभी बाकी है और यह लड़ाई अभी खत्म नहीं होने वाली। उम्मीद है कि पाकिस्तानी हुक्मरां जरूर इससे कुछ सबक हासिल करेंगे, क्योंकि खुद उनकी देह इन दहशतगर्दों के घावों से लहूलुहान होती रही है। जैश का मुखिया मसूद इतना मनबढ़ है कि इसने जनरल परवेज मुशर्रफ के काफिले पर ही हमला करवा दिया था। आज ‘इमरान खान शर्म करो, शर्म करो' के नारे लगाने वाली पाकिस्तान की संसद ने एक मत से घोषणा की है कि वे अपने राजनीतिक मतभेद भुलाकर साथ लड़ेंगे। काश! वे भारत से लड़ने की बजाय अपनी आस्तीन में पल रहे इन संपोलों से जूझने का संकल्प ले लेते। इससे न सिर्फ उनके दर्द दूर हो जाएंगे, बल्कि उनके चेहरे पर पड़े तमाम दाग भी साफ हो सकेंगे। रही बात भारत की, तो 26 फरवरी, 2019 का दिन इस मायने में हमेशा याद किया जाएगा कि हमने आतंक से लड़ने की अपनी ‘पुरानी चदरिया' को तहाकर रख दिया है। मेरा भारत न दबेगा, न झुकेगा, हमला होने पर अब घर में घुसकर मारेगा।